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ड्रिप इरिगेशन है आज की जरूरत - जाने इसके फायदे और प्रकार

ड्रिप इरिगेशन प्रणाली ज्यादा असरदार साबित हुई है I

सामान्य सिंचाई के तरीकों की अपेक्षा ड्रिप इरिगेशन प्रणाली ज्यादा असरदार साबित हुई है । इस प्रणाली में पूरे क्षेत्र की सतह के बजाय केवल पौधों की रूट जोन को सींचा जाता है । जिससे पानी की एक-एक बूंद का सही इस्तेमाल होना संभव हो पाता है । ड्रिप सिंचाई प्रणाली में दबाव के तहत पानी लगाया जाता है, छोटे उत्सर्जकों के माध्यम से एक बार में एक बूंद टपकता है । पानी को खेत की सतह के एक हिस्से के ऊपर बारीक बूंदों के रूप में भी छिड़का जा सकता है । ड्रिप इर्रिगेशन प्रणाली के चार प्रकार हैं -

1. बिंदु-स्रोत उत्सर्जक (ड्रिप बब्बलर)

 2. इन-लाइन ड्रिप एमिटर

 3. बेसिन बुबलर

4. माइक्रो स्प्रे स्प्रिंकलर

 ये सभी आकार और आंतरिक डिजाइन में भिन्न हैं ।

 

    ड्रिप इर्रिगेशन के लाभ

 

1. ड्रिप इरिगेशन मिट्टी के नमी के स्तर का प्रबंधन करता है । जब फसल की नमी एक स्तर से नीचे चले जाती है तो फसलों की तुरंत सिंचाई इसके द्वारा की जाती हैI

2. ड्रिप इरिगेशन प्रणाली में सिंचाई के साथ उर्वरकों और कीटनाशकों का अनुप्रयोग किया जा सकता है ।

  3. अन्य सिंचाई के तरीकों की अपेक्षा ड्रिप इरिगेशन के द्वारा स्थानीय मिट्टी के गीले पन के कारण उगने वाली खरपतवार की वृद्धि सीमित की जा सकती है ।

4. ड्रिप इरिगेशन की एक और खास बात यह है कि इस से  की जाने वाली सिंचाई को बारिश आदि होने पर किसी भी समय रोका जा सकता है । इससे पानी की बचत तो होगी ही ,मिट्टी में जरूरत से ज्यादा गीलापन होने की आशंका भी खत्म हो जाती है ।

5.  ड्रिप इरिगेशन अन्य सिंचाई के तरीकों के मुकाबले स्थापित करने में ज्यादा आसान और सस्ती भी साबित होती है ।

 6. ड्रिप इरिगेशन किसी भी क्षेत्र मिट्टी और फसल के प्रकार पर इस्तेमाल किया जा सकता है । यह  विशेष रूप से उच्च मूल्य पंक्ति फसलों के लिए उपयुक्त है ।

 

ड्रिप इरीगेशन की सीमाएं और शर्तें

 सिंचाई के अन्य तरीकों की बजाए ड्रिप इरिगेशन बेहतर जरूर है । लेकिन इसकी भी कुछ शर्ते एवं सीमाएं हैं । जिनका इसे लगाते वक्त ध्यान रखा जाना महत्वपूर्ण है ।

 

1. ड्रिप इरीगेशन में इस्तेमाल होने वाले छोटे आउटलेट, मिट्टी ,केमिकल, फर्टिलाइजर या अन्य जैविक पदार्थों के कारण जाम हो जाते हैं ।

2. कीड़ों और जीव जंतुओं द्वारा प्लास्टिक के पाइप खराब होने का खतरा होता है ।

   3. असमतल या ऊंची नीची जमीन पर पानी का वितरण कम या ज्यादा हो सकता है ।

4. फसल क्षेत्र में दो सिंचाई चक्रों के बीच खार जमा होने का खतरा होता है

5. ड्रिप सिंचाई प्रणाली विफल होने पर पानी के अभाव या अति के कारण पौधे खराब हो सकते हैं ।

 

 

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